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Archana Verma

Tragedy

4  

Archana Verma

Tragedy

बेखबर

बेखबर

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29

कब, कहाँ, किधर 

कुछ पता नहीं....

जिंदगी चल रही पर

कोई ख़बर नहीं....

एक पल देखूँ तो 

बहुत कुछ है, पर 

आने वाले कल का 

कुछ पता नहीं....

'दशा ' तो दिख रही है

लेकिन....

'दिशा ' की ख़बर नहीं....

' यूँ 'तो अपनों से घिरी हूँ 

जहाँ अपनापन हो 

ऐसी....

कोई जगह नहीं

कब, कहाँ, किधर 

कुछ पता नहीं 

जिंदगी चल रही है

पर कोई ख़बर नहीं....!



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