STORYMIRROR

Aanart Jha

Inspirational

3  

Aanart Jha

Inspirational

बसंत

बसंत

1 min
259

प्रकृति के भी अनोखे रंग छूटे हैं

हर और नए कोपल फूटे है


हर तरफ एक अद्भुत छटा छाई है

प्रकृति भी फिर मुस्कुराई है


हर एक पल कुछ पल का फसाना 

मौसम को आना और फिर जाना है

आज पतझड़ है तो बहार को कल

फिर आना है

हर एक बसंत को, यही सबको

बताना है


शाखों से जो पत्ते गिरे हैं तो नए

खिलेंगे भी 

आज कुछ बिछड़े है तो कल कुछ

नए मिलेंगे भी 

यही बात सबको बताती 

ऋतु बसंत हर साल आती है


मौसम हुआ फिर से सुहाना है 

फिर कुछ नए जोड़े को मिलना है 

कुछ नई कहानी बनाना है

बसंत का यह इतिहास पुराना है


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Inspirational