STORYMIRROR

Abishake mandhania

Classics

4  

Abishake mandhania

Classics

बसंत ऋतु

बसंत ऋतु

1 min
411

मेघ में छाईं काली घटा से 

बरसने वाली बूदें से मिट्टी 

की खुशबू महकती है 


सुबह सुबह वो गाँव में 

सूर्योदय का नजारा जब

चिड़ियों की आवाज चारों

तरफ चहकती है


मौसम ने भी आज अलग

सी अंगड़ाई खाई है


चारों तरफ सिर्फ हरियाली

 ही हरियाली छाई है


सारी कुदरत रंग बिरगे फूलों

 से आज नहलाई है


हर कोई खुश हो गया जब

 से वसंत ऋतु।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Classics