बोलना जरूरी है..!
बोलना जरूरी है..!
जब स्वार्थ सर चढ़कर बोलने लगे
जब शराफत घुट घुटकर जीने लगे
जब उसूलों पर मखमली पैबंद लग जाए
जब हर ओर घोर निराशा छा जाए
तब बोलना जरूरी है ।
जब कानून सिर्फ अमीरों की सुने
जब गरीब न्याय के लिए एड़ियां रगड़ता फिरे
जब सयंम का दामन छुटने लगे
जब विचारों पर कारागार होने लगे
तब बोलना जरूरी है ।
जब खामोशी रिश्तों को खाने लगे
जब मुसीबत में अपने दामन छुड़ाने लगे
जब गलतियों पर पर्दा होने लगे
जब आँखें शर्म से झुकने लगे
तब बोलना जरूरी है ।
जब शब्द दिल पर आघात करने लगे
जब दिल पर नये नये घाव दिखने लगे
जब सब्र का बांध छलकने लगे
जब आँखों से ख़्वाब छूटने लगे
तब बोलना जरूरी है ।
जब प्रेम दर्द देने लगे
जब भरोसा टूट कर बिखरने लगे
जब इंतजार लम्बा होने लगे
जब संबंधों में अपनापन खोने लगे
तब बोलना जरूरी है ।
जब सच बोलकर भी अपमानित होना पड़े
जब आत्म सम्मान पर कुठाराघात होने लगे
जब पहचान पर तुम्हारे प्रश्नचिन्ह लगने लगे
जब अधिकारों का तुम्हारे हनन होने लगे
तब बोलना जरूरी है ।
