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JAYANTA TOPADAR

Tragedy

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JAYANTA TOPADAR

Tragedy

बंटे हुए लोग...

बंटे हुए लोग...

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किश्तों में मिलती हैं यहाँ

दुनिया के बाज़ार में

तमाशा-ए-ज़िंदगी...

सोच में दरार,

दिल में दबी-दबी-सी घुटन...

दिमागी माथापच्ची में

यूँ ही बीत जाती है

शाम-ए-ज़िंदगी...


ये कभी न खत्म होनेवाला

सिलसिला-ए-इंतज़ार...

बस भीड़ में शामिल

अनजान चेहरों की

आननफानन आवाजाही..

और बेइंतहा सूनापन...


क्यों अपने ही धुन में

आगे निकल जाने की होड़... ?

कैसी ये तपीश... ?

कैसा ये बेगानापन ?

और कितनी हेराफेरी

चलती रहेगी

इस रंग-ए-महफिल में...??


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