STORYMIRROR

सोनी गुप्ता

Abstract Romance Inspirational

4  

सोनी गुप्ता

Abstract Romance Inspirational

बिछड़ना ही नसीब था

बिछड़ना ही नसीब था

1 min
188

तुम्हारी राहों को अपना समझ 

हम तुम संग चल पड़े थे, 

जब-जब तुम तन्हा दिखे 

हम हमेशा तुम्हारे साथ खड़े थे, 


पर आज यह क्या हुआ 

क्यों किस्मत ने करवट बदली, 

साथ तुम्हारा बीच राह पर ही 

जाने क्यों हमसे छूट गया,


दूर हुए तुम हमसे 

शायद बिछड़ना ही नसीब था हमारा,

आज अकेले खड़े उन राहों में 

जहाँ कभी साथ था तुम्हारा !


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract