राजकुमार कांदु
Tragedy Classics
बहूरानी
होती हैरानी
पति तो खामोश
सास करती मनमानी
कब सोना कब जगना
क्या खाना क्या पीना
सास ही तय करती
कैसे है जीना
क्या आम और क्या खास
सबके घर की यही कहानी
कहीं बहू, बेटी बनी
तो कहीं बनी नौकरानी।
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अनगढ से अल्फा...
होली गीत
मुक्तक
आज का नेता
तूफान
आरजू
तू भारत वर्ष ...
इक दीप जलाओ उ...
पहले जैसा न होने के लिए इंसान को गुजरना पड़ता है बेरुखी के एक दरिया से। पहले जैसा न होने के लिए इंसान को गुजरना पड़ता है बेरुखी के एक दरिया स...
खुशियाँ छीन ली थी उससे , ये समाज क्यों नंबरों का भूखा है खुशियाँ छीन ली थी उससे , ये समाज क्यों नंबरों का भूखा है
हर शाम चौराहें दुल्हन की तरह सजते थे जहाँ इंसानों के कह्कहे गूंजते थे। हर शाम चौराहें दुल्हन की तरह सजते थे जहाँ इंसानों के कह्कहे गूंजते थे।
राधा-सा स्मरण में झुलस रहा तन-मन बैरागिन होकर विचर रहती मैं बन-बन। राधा-सा स्मरण में झुलस रहा तन-मन बैरागिन होकर विचर रहती मैं बन-बन।
ए हमारे प्यारे साथी हम तो तुम से रुठे थे क्षणिक। ए हमारे प्यारे साथी हम तो तुम से रुठे थे क्षणिक।
सर्दी की ठिठुरन अलग है सबके लिए। सर्दी की ठिठुरन अलग है सबके लिए।
एक रात और चाहिए जिंदगी का, सफर है सुहाना इस जिंदगी का। एक रात और चाहिए जिंदगी का, सफर है सुहाना इस जिंदगी का।
याद है वो गांव में गुजारा जमाना, खेतों की सोंधी माटी का खजाना। याद है वो गांव में गुजारा जमाना, खेतों की सोंधी माटी का खजाना।
बहुत कठिन होता है स्त्री का प्रतिभाशाली होना। बहुत कठिन होता है स्त्री का प्रतिभाशाली होना।
बेटों को तो मिला सम्मान, परन्तु बेटियां ना किसी को भायीं। बेटों को तो मिला सम्मान, परन्तु बेटियां ना किसी को भायीं।
सच है.. आँखें सबकी पीड़ा देखती हैं। सच है.. आँखें सबकी पीड़ा देखती हैं।
कोई समझ नही सकता, मेरे इस विरह के दुःख को। कोई समझ नही सकता, मेरे इस विरह के दुःख को।
युवाओं मिटा दो अब रूढ़िवादिता निशान को, पुनः सोन चिरैया बना दो, मेरे हिंदुस्तान को। युवाओं मिटा दो अब रूढ़िवादिता निशान को, पुनः सोन चिरैया बना दो, मेरे हिंदुस्त...
"कहलाना तो है मानव हमको, पर पशु सा हमे सब करने दो। "कहलाना तो है मानव हमको, पर पशु सा हमे सब करने दो।
आ गया है अब ऐसा जमाना न जाने कब दुर्घटना से हो सामना। आ गया है अब ऐसा जमाना न जाने कब दुर्घटना से हो सामना।
भौतिकता की अंधी दौड़ में क्या से क्या हम हो गए भौतिकता की अंधी दौड़ में क्या से क्या हम हो गए
खिले खिले , मुस्कुराते गजरे मोगरे के- थका- थका ,मुरझाया फूल-एक बालक! खिले खिले , मुस्कुराते गजरे मोगरे के- थका- थका ,मुरझाया फूल-एक बालक!
बाल विवाह समस्या है भारी, इस ज्वाला में जलती छोटी सी किलकारी। बाल विवाह समस्या है भारी, इस ज्वाला में जलती छोटी सी किलकारी।
तुम लड़की हो तुम्हारा है सारा सम्मान, मैं लड़का हूँ मैं तो हूँ हीं आवारा बदनाम। तुम लड़की हो तुम्हारा है सारा सम्मान, मैं लड़का हूँ मैं तो हूँ हीं आवारा बदन...
माता-पिता की पीड़ा को कोई समझ ना पाए बच्चों की परवरिश करते करते एक बाप बूढ़ा हो जाए। माता-पिता की पीड़ा को कोई समझ ना पाए बच्चों की परवरिश करते करते एक बाप ...