मुक्तक
मुक्तक
1 min
353
इत उत क्यों तू भटक रहा जब,
अंतस पैठे इश खोज रहा तू मंदिर मंदिर
कण कण में जगदीश
मुझमें है वो, तुझमें है वो
कहाँ नहीं है ये बतलाओ
रोम रोम में वही बसा है
पग नख ते तन शीश।
