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V. Aaradhyaa

Tragedy Inspirational

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V. Aaradhyaa

Tragedy Inspirational

बहती नदिया, उथला पानी

बहती नदिया, उथला पानी

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जीवन की है यही कहानी,

बहती नदिया और उथला पानी!


कल थे जिनके नाम वाम बहुत, 

आज वो नाम एकदम से गुम गये !

    

जो सोचा करते थे कि दुनियाँ, 

सदा रहेगी बंद उनकी मुठ्ठी में !


धरती से जब नाता टूटा तो,

जल के हो गये खाक भट्टी में !


जो करते थे खुद पे बहुत गुरूर , 

सारा आसमान मुठ्ठी में रखते थे !


जल के हो सब खाक हो गए,

बस राख ही मुठ्ठी भर रह गये !


जीवन का है यही फसाना,

इक दिन रूखतस होना है!


टुट गयें सारे उनके सपने,

धरे रह गये उनके फ़साने !

     

माया दौलत भी खूब बटोरें, 

बहुत बनाये महल चौबारे !


धरें रह गयें सब धरा पर सारे, 

बस खाली मुठ्ठी लेक़र हारे !


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