भर लो रंग !
भर लो रंग !
हर किसी के पास अपनी तूलिका ,
भाव अनुभव की है सुंदर भूूमिका।
कैनवस पर चढ़ा डालो भाव मन का ,
दर्द की पीड़ा,तड़प, खुशियों के रंंग का ।।
धधकती ज्वाला करे जब जब परीक्षा,
सत्य फिर - फिर प्रकट हो देता ये शिक्षा ।
बेवजह मांगो न तुम प्रभु से भिक्षा ,
श्रम करो फिर कर चाहे प्रतीक्षा।।
हर तरफ भागा करे यह ज़िन्दगी ,
कितनी भी करते रहे थे बंदगी।
उम्र मानो पूछती है क्रोध करके ,
मन धवल था कालिखों से रंग क्यों दी।।
