Pradeepti Sharma
Abstract Others
रात मधुर ये, नीर सी शीतल,
राग मन का,
अग्नि सा चंचल,
दो स्वर ही बस गाए,
रा से राह वो चल ओ साधक,
म से मंगल जहाँ हो जाए,
बस राम राम बोल,
हर श्वास में भरकर,
ये ही भक्ति मार्ग कहलाए।
तुम हर मौसम य...
इंदुकला
इन्साफ
एक प्रेम ऐसा ...
वक़्त
जीवंत
सड़क
ठहराव
स्वीकृति
धारा
क्या सोचा था कभी, कि ऐसे दिन भी आएँगे। क्या सोचा था कभी, कि ऐसे दिन भी आएँगे।
श्रमिक को मिले श्रम का सुख, समाज में ऐसी व्यवस्था बनाएंगे। श्रमिक को मिले श्रम का सुख, समाज में ऐसी व्यवस्था बनाएंगे।
क्या शौक नहीं इनको, निज जननी पर काम मिले। क्या शौक नहीं इनको, निज जननी पर काम मिले।
उसकी बचत बैंक का पैसा भी मुझसे ही जाता है। उसकी बचत बैंक का पैसा भी मुझसे ही जाता है।
तो मेरे देश का मजदूर कोरोना से पहले भूख से मर जाएगा। तो मेरे देश का मजदूर कोरोना से पहले भूख से मर जाएगा।
न्तज़ार की मिलन होगी, ख्वाहिशों का संगम जहां। न्तज़ार की मिलन होगी, ख्वाहिशों का संगम जहां।
कहीं कोई सीप होता मोती सा चमकता होता। गर मैं, मैं न होता ? कहीं कोई सीप होता मोती सा चमकता होता। गर मैं, मैं न होता ?
विस्मित करता है मुझे मिट्टी का सख्त हो जाना। विस्मित करता है मुझे मिट्टी का सख्त हो जाना।
सरेआम रिश्तों के मकान नीलाम होते देखे हैं..! सरेआम रिश्तों के मकान नीलाम होते देखे हैं..!
हैं सबके अपने-अपने रंग फिर भी सबका कफ़न सफेद ! हैं सबके अपने-अपने रंग फिर भी सबका कफ़न सफेद !
चलो आज जीवन की डलिया में हम सारी कलियों को चुन करके छाँटे भरें। चलो आज जीवन की डलिया में हम सारी कलियों को चुन करके छाँटे भरें।
मुझे इन्हीं की तरह फिर उड़ान भर कर एक नए आसमां में उड़ना है। मुझे इन्हीं की तरह फिर उड़ान भर कर एक नए आसमां में उड़ना है।
आज भी है वो मेरा पक्का यार, मेरा पहला, सच्चा बचपन का प्यार। आज भी है वो मेरा पक्का यार, मेरा पहला, सच्चा बचपन का प्यार।
जो ज़िंदा है अपने ख्वाब से मैं कहाँ रहता हूं यहाँ। जो ज़िंदा है अपने ख्वाब से मैं कहाँ रहता हूं यहाँ।
डोली है ये अपना जीवन आशाओं का उपहार। डोली है ये अपना जीवन आशाओं का उपहार।
जय भी तो ये हो सकेगी तब ही पूरी, विजय हित दो गज दूरी है बड़ी जरूरी। जय भी तो ये हो सकेगी तब ही पूरी, विजय हित दो गज दूरी है बड़ी जरूरी।
छोटे से मास्क की मर्जी पर देखो जीवन डोर बांधी है। छोटे से मास्क की मर्जी पर देखो जीवन डोर बांधी है।
बाबू सापों की दुनिया है ये, तू बन नेवला। बाबू सापों की दुनिया है ये, तू बन नेवला।
विश्वास दिखता नहीं पर प्यार का भार जन्म भर उठाते हैं संबंधों की डोरी। विश्वास दिखता नहीं पर प्यार का भार जन्म भर उठाते हैं संबंधों की डोरी।
तुझसे छिपा ना कुछ भी आज तक, मेरी हर दहलीज पर फिज़ा है तेरी। तुझसे छिपा ना कुछ भी आज तक, मेरी हर दहलीज पर फिज़ा है तेरी।