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Shubhra Ojha

Abstract

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Shubhra Ojha

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कोरोना का डर

कोरोना का डर

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यहांँ अमेरिका में कोरोना के डर से

सभी हैं घर में बैठे

कोई बेवजह कहीं नहीं जाता

ऑफिस का काम तो

वर्क फ्रॉम होम हो जाता,

घर में राशन और सब्जियांँ


आती हैं सब ऑनलाइन

हमको भी गेवर्मेंट के उपायों से 

होना हैं अलाइन, 

डिलिवरी मैन चावल - आटा

घर तक देके जाता

वायरस के डर से 


कोई सामान को हाथ नहीं लगता,

सभी सामग्री घर के बाहर 

गैराज में रखवाया जाता,

दो दिन बाद गलफ्स पहनकर

सारा सामान घर में लाया जाता,

उसके बाद डिसइन्फेक्टेड वाइप्स से


सारा पैकेट करना होता साफ़,

अपनी जगह सभी सामान जमाने के बाद

बीस सेकंड तक धोना होता अपना हाथ,

इतने प्रिकासन के बाद भी 

कोराना का डर दिल से नहीं जाता,


लेकिन यह सब बातें

मेरे देश का मजदूर कहांँ समझ पाएगा,

वो भूखा प्राणी

उसे कोई भी कुछ भी खाने को देकर

दो चार फोटो खिचवाएगा,


वो बिल्कुल नहीं समझेगा

वायरस का स्ट्रक्चर

उसे हाईजीन का भी

नहीं हैं कोई चक्कर,

जब वो देखेगा भर पेट खाना


तो सबसे पहले छक कर खाएगा

अगर भर नहीं पाया पेट उसका

तो मेरे देश का मजदूर

कोरोना से पहले 

भूख से मर जाएगा।


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