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Kunal Goswami

Abstract

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Kunal Goswami

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आशिकी

आशिकी

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मैंने कैसी ये आशिकी कर ली

अपनी नाकाम ज़िंदगी कर ली


तेरे जाने के बाद कुछ यूँ हुआ

मेरी खुशियो ने ख़ुदकुशी कर ली


तेरी तसवीर को बनाया और

रोशनाई से रोशनी कर ली


आपके हौसलों का क्या कहना

आपने फिर से दिल्लगी कर ली


और उम्मीद उनसे क्या कीजे

हैं दरिन्दे दरिंदगी कर ली


बेवफ़ा मैंने तो तेरी ख़ातिर

अपने यारों से दुश्मनी कर ली


धीरे धीरे मुझे भुलाया और

फिर मोहब्बत भी दूसरी कर ली


फिर किसी से न इश्क़ हो पाया

इसलिए मैंने शायरी कर ली। 


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