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Kunal Goswami

Others

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Kunal Goswami

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ग़ज़ल

ग़ज़ल

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चाहता था मैं लेकिन मिला ही नहीं 

बाग में फूल अकेला दिखा ही नहीं 


दरबदर मैं इसे ले के फिरता रहा 

मेरी क़िस्मत का सिक्का चला ही नहीं 


मेरे घर से गया चोर होकर निराश 

दर्द को छोड़ कर कुछ मिला ही नहीं 


एक दरिया मेरी आँखों से बहता है 

जो समुन्द्र कभी पा सका ही नहीं।



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