STORYMIRROR

Vikram Kumar

Action

4  

Vikram Kumar

Action

भारत के जर्रे जर्रे में

भारत के जर्रे जर्रे में

1 min
491

भारत के जर्रे जर्रे में बसी है जिनकी याद

आज आजादी के लगभग कई दशकों के बाद

अब सच्ची सी लगती है पुनर्जन्म की बात मुझे

देश की सीमा पर खड़ा भगत बिस्मिल आजाद


सुकून के उजालों उद्विग्नता के गहरे कूप में

सर्दी में बरसात में और कडा़के की धूप में

वे प्रफुल्ल खुदीराम जी अभी भी जीवित हैं

देश की सरहद पर डटे जवानों के रुप में


देश पर जान लुटाने वालों का नाम सदा आबाद रहे

हमारा हर सिंह बने भगत और पंडित आजाद रहे

वंदे मातरम हो हर दिल में मंत्र सदा सत्यमेव बने

हर गुरु हो राजगुरु जैसा और हर देव सुखदेव बने


गगन को चूमे सदा तिरंगा धरा का धानी परिधान रहे

सांगा प्रताप शिवाजी कुंवर सा देश का स्वाभिमान रहे

उस भारत में इस भारत में कुछ भी न अंतर निकले

हर गुरु हमारा हो गोविंद विद्यार्थी गणेश शंकर निकले


हिन्द देश की पहरेदारी फिर से चौबंद चाक बने

वो बिठूर का नाना साहब फिर भारत मां की नाक बने

नासिक में तात्या फिर जन्में काशी से मन्मनाथ आए

शाहजहांपुर का हर बालक फिर रोशन अश्फाक बने


हम नहीं भूल सकते कभी उस आजादी की बात को

हम नहीं भूल सकते मंगल को वीर राजेन्द्र नाथ को

हम नहीं भूल सकते उस दुर्गा सी लक्ष्मी बाई को

एक सूत्र में हिन्द को लाने वाले बल्लभभाई को


भारत भूमि पर इन वीरों की गाथा का अमिट निशान पड़ा

हर सेनानी फौजी बनके है जीवित हमारे बीच खड़ा।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Action