Hurry up! before its gone. Grab the BESTSELLERS now.
Hurry up! before its gone. Grab the BESTSELLERS now.

Vikram Kumar

Tragedy


4  

Vikram Kumar

Tragedy


इंसान का ईमान ही सबसे बड़ा धन है

इंसान का ईमान ही सबसे बड़ा धन है

1 min 202 1 min 202

सबके मन में लोभ की पुरजोर अगन है

अपने - अपने स्वार्थ में संसार मगन है

बेईमानी करके कमाया कि गंवाया

इंसान का ईमान ही सबसे बड़ा धन है

 

कुछ भी नहीं रखा हुआ है धोखे में, छल में

स्वीकार्य नहीं चोरियां , न आज, न कल में

सोचता इस बात को क्यों नहीं जन है

इंसान का ईमान ही सबसे बड़ा धन है


दूर खुद से हम करें ये सारी बलाएं

सत्य और ईमान की मशाल जलाएं

जैसा हम बनाएं वैसा होता ये मन है

इंसान का ईमान ही सबसे बड़ा धन है!



Rate this content
Log in

More hindi poem from Vikram Kumar

Similar hindi poem from Tragedy