भारत जोड़ो यात्रा
भारत जोड़ो यात्रा
पद, प्रतिष्ठा ,पहचान, धन की लड़नी हैं जंग,
पदयात्रा में आम जनता को लेना होगा संग।
जानने उनका स्वभाव ,हाल-चाल और जीने का ढंग,
आम जनता बना कर, चलना होगा उनके संग-संग।
महात्मा की पद यात्रा से बनी थी असली पहचान,
पूरे देश भ्रमण से बापू को मिला था असली ज्ञान।
जमीन पर चलकर, पूरब से पश्चिम ,उत्तर से दक्षिण,
सभी देशवासियों ने गांधी को दिया था तन-मन-धन।
पद यात्रियों के ताकत ने बापू में डाली थी असली जान,
उसी ताकत ने जड़ से हिलाया था अंग्रेजों का सिंहासन।
बिना किसी अस्त्र से बापू ने जीती थी आजादी की जंग,
क्योंकि बापू के पद यात्रा में देशभक्त आम जनता थी संग।
आजाद भारत में कमजोर हो रही हैं लोक शाही की पहचान,
आम जनता हैं, रोटी, कपड़ा व मकान के लिए परेशान।
भारत जोड़ों यात्रा ने फिर जगायें आम जनता के अरमान,
गंगा –जमुना तहजीब से ही बनी रहेंगी देश की पहचान।
ओछी राजनीति ने पाया देशभक्ति से ऊंचा स्थान,
राजनेताओं की धर्म पे राजनीति हैं खूब मेहरबान।
नेताओं ने खोली हैं हर गली में नफरत की दुकान,
क्या भारत जोड़ो यात्रा खोलेगी न्याय, सम्मान, प्यार की दूकान ?।
