Anshika Agarwal
Tragedy Inspirational
यूं ही बदनाम है बेवफाई,
प्यार और यारी में,
बेवफाई तो वो होती है,
जो इंसान में होती है,
जो दूसरो के लिए अपनों को
बेवफा कर देते हैं।
दोस्ती
मां
खास
विश्वास
समय
बेवफ़ाई
हाशिया
लोंग डिस्टेंस...
भरोसा
बेस्ट फ्रेंड ...
कोरोना से तो बच गए साहब पर अर्थ तंगी से नहीं बच पायेंगे! कोरोना से तो बच गए साहब पर अर्थ तंगी से नहीं बच पायेंगे!
है जहां क़ीमत लिपि कि, कलम को वही गोदना है... है जहां क़ीमत लिपि कि, कलम को वही गोदना है...
अनजाने ये लड़कियां उत्पाद हो जाती हैं मानसिक उपभोग के लिए। अनजाने ये लड़कियां उत्पाद हो जाती हैं मानसिक उपभोग के लिए।
अरे महंगाईरानी तू बड़ी बेशरम है मुझे लगती तू सुरसा की बहन है! अरे महंगाईरानी तू बड़ी बेशरम है मुझे लगती तू सुरसा की बहन है!
मन कितना स्वार्थी हो चला है! मन कितना स्वार्थी हो चला है!
फ़िर भी होंठों को चाटता रहा, उम्मीद की बूंदों के तलाश में । फ़िर भी होंठों को चाटता रहा, उम्मीद की बूंदों के तलाश में ।
साथ में बड़ी सी गाड़ी भी लाया है, आज फिर कोई लड़का बिकने आया है। साथ में बड़ी सी गाड़ी भी लाया है, आज फिर कोई लड़का बिकने आया है।
संदेशे आते थे जब घर से उन दिनों नम हो जाती थीं आँखें पढ़ते पढ़ते संदेशे आते थे जब घर से उन दिनों नम हो जाती थीं आँखें पढ़ते पढ़ते
सुबह का वो मासूम फ़लक बुजुर्ग हो ना जाता यूँ ही, सुबह का वो मासूम फ़लक बुजुर्ग हो ना जाता यूँ ही,
बलिदान और बलात्कार की खबरें जन्म और मृत्यु की खबरें दंगा फसाद की खबरें। बलिदान और बलात्कार की खबरें जन्म और मृत्यु की खबरें दंगा फसाद की खबरें।
कलयुग की करतल ध्वनि बाजे चारों ओर! कलयुग की करतल ध्वनि बाजे चारों ओर!
कब तक, ये आग यूँ बरसेगी । जन्नत सुख चैन ,को तरसेगी। कब तक, ये आग यूँ बरसेगी । जन्नत सुख चैन ,को तरसेगी।
थी ये सृस्टि पहले अँधेरे से घिरी, शून्य भरे किरण ने इसमें उजाले की उम्मीद भरी! थी ये सृस्टि पहले अँधेरे से घिरी, शून्य भरे किरण ने इसमें उजाले की उम्मीद भर...
कलम की नोक पे लिखे थे जो वो आत्म-लिपी कैसे मिट गया। कलम की नोक पे लिखे थे जो वो आत्म-लिपी कैसे मिट गया।
साया भी कभी कभी साथ छोड़ जाता, रात का इंतज़ार अगर सुबह तक के लिये।। साया भी कभी कभी साथ छोड़ जाता, रात का इंतज़ार अगर सुबह तक के लिये।।
सब्र, सुविचार सदाचार न जाने उस पल कहाँ गए सब्र, सुविचार सदाचार न जाने उस पल कहाँ गए
जब चार घाव लगाता तब देखता, प्रांगण में मुक्त खेल रहे बच्चों को! जब चार घाव लगाता तब देखता, प्रांगण में मुक्त खेल रहे बच्चों को!
आदमी एक दूसरे को झिंझोङता ईक वहशी,ईक शैताान।। आदमी एक दूसरे को झिंझोङता ईक वहशी,ईक शैताान।।
उजड़ा जो चमन अपना कुसूर किसका कैसे बोलूं उजड़ा जो चमन अपना कुसूर किसका कैसे बोलूं
भँवरों के हैं नाविक सारे नौका पार लगाए कौन ? भँवरों के हैं नाविक सारे नौका पार लगाए कौन ?