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नम्रता चंद्रवंशी

Romance

3  

नम्रता चंद्रवंशी

Romance

बेरुखी

बेरुखी

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तुम्हारी बेरुखियों से ,

रिश्ता कुछ खास हो गया है l

भुला दिया था हमने ,

खुद के लिए जीना ,

ज्जबातों से मेरे ,

तुम बेरुख जो हुए ,

ज़िन्दगी बाकी है अपनी भी जीनी ,

मुझको भी अब ये एहसास हो गया हैl


य़ादों की गालियों मे अब ,

बेरुखियों को ही सजाया है l

परवाह सच न हो ,

शायद तुम्हारी,

बेपरवाही का रिश्ता ,

है दिल से बनाया ,

अंदाज ये तेरा निभाने के रिश्ते ,

मैने भी दिल से आपनाया है l


मतलब के प्यार से ,

बेमतलब की बेरुखी मुझे भा गई है l

दिन को सुकून,

और चैन है रातों को,

इंतेजार.. अब तो ,

न रहता किसी का,

खुद मे ही खुशियां है अपनी समाहित ,

ढूंढने की मुझको कला आ गई है l



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