STORYMIRROR

गणेश नेगी

Drama

3  

गणेश नेगी

Drama

बदलाव की बहस

बदलाव की बहस

1 min
322

क्या सोचा हैं सब ऐसा ही चलेगा

आँखें खो दोगे तो ऐसा ही दिखेगा,


रास्ता नहीं ये मंजिल की दौड़ हैं,

अभी हो जा घायल, 

तभी तो तू आगे भी बचेगा।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Drama