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गणेश नेगी

Fantasy Others

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गणेश नेगी

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अधूरे सपने (गणेश)

अधूरे सपने (गणेश)

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की बोल दूँ झूठ की रास्ता बचा नहीं,

की बोल दूँ झूठ की रास्ता बचा नहीं,

सच ये है की मंजिल ही मुझे जँचा नहीं,

मैं था जिस सपने को सच करने की उम्मीद से,

कर दूँ सच पर अब उसमें वो मजा नहीं ।

    


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