STORYMIRROR

गणेश नेगी

Fantasy Others

2  

गणेश नेगी

Fantasy Others

अधूरे सपने (गणेश)

अधूरे सपने (गणेश)

1 min
138

की बोल दूँ झूठ की रास्ता बचा नहीं,

की बोल दूँ झूठ की रास्ता बचा नहीं,

सच ये है की मंजिल ही मुझे जँचा नहीं,

मैं था जिस सपने को सच करने की उम्मीद से,

कर दूँ सच पर अब उसमें वो मजा नहीं ।

    


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Fantasy