बदल गए...
बदल गए...
गुनाहों की दुनिया में भलाई का मोल नहीं,
सच्चाईयां परखने के पैमाने भी बदल गये,
जिस्मानी रिश्तों का ही सजता बाज़ार नहीं,
रूहानी रिश्तों के सिलसिले भी बदल गये...
ऐ जिंदगी तुझसे अब कोई शिक़ायत नहीं,
तेरे मेरे सुकून के तो फलसफे बदल गये,
किसी से शिकवा शिकायत का कोई मायने ही नहीं,
हौले हौले यूं ही हमारे नज़रिये बदल गये...
