STORYMIRROR

SHREYA BADGE

Tragedy

4  

SHREYA BADGE

Tragedy

बदल गए...

बदल गए...

1 min
279

गुनाहों की दुनिया में भलाई का मोल नहीं,

सच्चाईयां परखने के पैमाने भी बदल गये,

जिस्मानी रिश्तों का ही सजता बाज़ार नहीं,

रूहानी रिश्तों के सिलसिले भी बदल गये...


ऐ जिंदगी तुझसे अब कोई शिक़ायत नहीं,

तेरे मेरे सुकून के तो फलसफे बदल गये,

किसी से शिकवा शिकायत का कोई मायने ही नहीं,

हौले हौले यूं ही हमारे नज़रिये बदल गये...


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Tragedy