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BHAVANA AHUJA

Abstract

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BHAVANA AHUJA

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बचपन

बचपन

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वो बचपन के दिन खूब याद आते हैं,

स्नेह और प्यार से भरपूर थे जो आँखों में समा जाते हैं,

दोस्तों संग बिताये दिन क्यों लौट के नहीं आते हैं?


वो पिट्ठू, छुपन-छुपाई, वो पानी में कागज़ की नाव,

वो तितली पकड़ना, माँ की डांट और नानी के प्यार की छाँव,

अपनों संग बिताये दिन रंगीली यादों से सताते हैं,

क्यों बचपन के दिन लौट के नहीं आते हैं?


वो निष्ठुर सी ठण्ड में भी बर्फ के गोले खाना,

वो कड़कती धूप में भी नंगे पाँव सड़को पर जाना,

वो हाथों की लकीरों में जुड़ते हुए चाँद को बनाना,

वो थके बिना स्कूल से आते ही खेलने निकल जाना,


हाँ, वो बचपन के दिन, खुशियों के ख़ज़ाने याद आते हैं,

क्यों वो नादान से दिन लौट कर नहीं आते हैं??


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