बच्चे
बच्चे
प्यार ममता के आंचल में खेला जिनका बचपन है,
वो बच्चे होते कितने भाग्यशाली जिनके सिर पर होता,
माता पिता का हाथ है दादा दादी का दुलार है,
छत्रछाया में सीख जाते वो संस्कार,
बच्चों की मासूमियत भरी अदाकारी पर न्यौछावर संसार,
बाल हठ जब करते कन्हैया तो कैसा अलौकिक दृश्य होता,
बच्चों की क्रीड़ाओं से शोभित होता हर घर अंगना,
बच्चों की दुनिया बड़ी निराली होती,
पल पल में हजारों रंग बदलती,
कभी खेल खिलौने कभी गुड्डे गुड़िया भाते,
कभी किताबों से दोस्ती हो जाती,
कभी लड़ते कभी झगड़ते,
तो कभी करते मस्ती भरी शरारतें,
तो कभी अपनी बातों से कितनी बड़ी बात समझा देते।
