STORYMIRROR

Husan Ara

Tragedy

3  

Husan Ara

Tragedy

बच्चे

बच्चे

1 min
250

वो रोक रही है तपिश को धूप की

वो थाम रही है हवा के तेज़ झोकों को


नर्म करना चाहती है पृथ्वी की कठोरता

जलाए रखना चाहती है आशा के दीप


अपने बच्चों के मन में बच्चोंं के लिए जीना है

उसे सांस लेते रहना है हर दुख सहते रहना है


परिस्थितियों को मात देते रहना है।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Tragedy