STORYMIRROR

Supriya Devkar

Romance

2  

Supriya Devkar

Romance

बैठो हमारे रूबरू

बैठो हमारे रूबरू

1 min
12

बैठो हमारे रूबरू 

करनी है कुछ बात 

कुछ सुनना है तुम्हारा 

सुनाने है कुछ जज्बात 

तुम अक्सर भागती हो 

कुछ वक्त छोड़ो मेरे लिए 

चाहता हूँ देखना तुम्हें 

कुछ प्यारे लम्हो के लिए

शिकायत तो कभी करती नहीं

मगर आवाज़ भी नहीं देती हो 

अपना बनाकर भी मुझ को यू 

पराया करके छोड़ देती हो 


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance