बैठो हमारे रूबरू
बैठो हमारे रूबरू
बैठो हमारे रूबरू
करनी है कुछ बात
कुछ सुनना है तुम्हारा
सुनाने है कुछ जज्बात
तुम अक्सर भागती हो
कुछ वक्त छोड़ो मेरे लिए
चाहता हूँ देखना तुम्हें
कुछ प्यारे लम्हो के लिए
शिकायत तो कभी करती नहीं
मगर आवाज़ भी नहीं देती हो
अपना बनाकर भी मुझ को यू
पराया करके छोड़ देती हो

