बातों से थाह
बातों से थाह
आओ
कुछ बातें करें
शायद उनसे कुछ
हल निकले,
उलझे धागों में
कोई सिरा मिले
या
आंखें ही खुले।
सपनो की बात
करते
शायद कोई
हक़ीक़त खुले
क्या
पीतल क्या सोना
ये ही थाह मिले
या तरसाती
मृगतृष्णा ही धुले।
आओ
कुछ बातें करें
शायद उनसे कुछ
हल निकले,

