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Neetu Tyagi

Romance

4.5  

Neetu Tyagi

Romance

बादल तुम थोड़ा ठहर जाते

बादल तुम थोड़ा ठहर जाते

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बादल ! तुम्हे इतना जल्दी लौट जाना था
तो तुम आये ही क्यों ?
बादल  ! तुम थोड़ा और ठहर जाते 
तो अच्छा होता ।
बिन भीगे कोनों में थोड़ा और बरस जाते 
तो अच्छा होता ।
बारिशों में भीगे मन को थोड़ा और भिगोते 
तब तुम जाते ।
भीगी लटों को थोड़ा सूख सँवर जाने देते
तब तुम जाते ।
फटे मेघों से उधेड़े जीवन को सिल जाते 
तब तुम जाते ।
विरह गीत को पूरा सुन जाते
तब तुम जाते ।
लहलहाते धान के नरम दानों को सहला जाते
तब तुम जाते ।
बादल तुम थोड़ा और ठहर जाते 
खिलती कलियों ,खिलते गुलाबों को मुस्कराते देखते 
तब तुम जाते तो अच्छा होता।



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