STORYMIRROR

Neetu Tyagi

Abstract Romance Classics

4.5  

Neetu Tyagi

Abstract Romance Classics

पूछना तुम चांद से

पूछना तुम चांद से

1 min
1

मैने कह दिया वो चाँद से
 जो कहना था तुम्हे प्यार से
तुम पूछ लेना चाँद से
 पर पूछना कुछ आस से
 यूं कि शर्माता है वो आप से
मैने समझाया उसे
आत्मा का आत्मा से
 कैसे होता मिलन ।
 प्राण की जीव में
 कैसी होती लगन ।
मैने कह दिया वो चाँद से
 जो छिपाया था आप से
 कुछ भाव मेरे मन के
 कुछ ख्वाब मेरे अपने
 कुछ नेह भरे गीत अनजाने ।
जो न कह पाई मैं चाँद से
 तुम पूछ लेना आप से ।
 उसने सुन लिया सब मान से
 मैने कह दिया वो चाँद से
 जो न कह पाई मैं आप से ।
आँसुओं ने कह दिया वो चांद से
 रोक न पाई मैं जिसे
नेत्र के द्वार से
जो छिपा था मौन में
 कह दिया सब चाँद ने ।
तुम भी कहना चाँद से
कुछ अपने अंदाज से
मैं समझ लूंगी तुम्हे
 चांद के दीदार से।। 


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract