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Devendraa Kumar mishra

Tragedy

4  

Devendraa Kumar mishra

Tragedy

अविचल

अविचल

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उसने कहा "मैं सत्य हूँ" 

लोगों ने हंसना शुरू कर दिया 

झूठे आरोप लगाने लगे 

भीड़ ने कहा _साबित करो. 

सत्य ने कहा _साबित क्या करना. मैं सत्य हूं सो हूं. 

बुद्धिजीवी तर्क करने लगे 

भक्त चमत्कार मांगने लगे 

झूठे भयभीत होकर विरोध करने लगे 

कानून सबूत मांगने लगा 

और सत्य से कहा गया _चले जाओ अन्यथा कारागार में डाल दिए जाओगे 

दर्जनों केस में फंसा दिए जाओगे 

जलाकर राख कर दिए जाओगे 

जनता का कोई भरोसा नहीं 

पत्थर बाजी, आगजनी के शिकार हो जाओगे 

सत्य फिर भी माना 

खड़ा रहा अविचल 

शासन प्रशासन ने मिलकर उसे पागल घोषित कर पागलखाने पहुंचा दिया. 



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