अतुल्य तुकांत !
अतुल्य तुकांत !
आँधी के जोर से भूकंपमान जब डरती है धरती,
उठता है एक तुकांत, गहरे विचारों का जगमग मंथन !
जहां शब्दों की बस्ती में अभिभावों की खेती होती है,
वहां तअपनी अलख बिखेर मन को मोह लेता है तुकांत!
सुंदर अभिव्यक्ति का रंगमंच सजाकर,
प्रेम, विरह, विचार, और भावों के अनमोल रत्न बिखेरता है तुकांत!
कविता के तारों की टिमटिम से जलकर,
अनदेखा रहा जग जिससे, उसी उजाले में प्रगट होता है तुकांत !
प्रेम के पथ में श्रव्य है उसका संगीत,
पर विरह के वियोग आगमन में रुलाता है तुकांत !
जीवन के रंगीन पलों को नव ऊर्जा देकर,
हंसी, खुशी, गम, और उदासी छू लेता है तुकांत!
अनुभव, व्यथा संपूर्ण कथा सुनाकर,
जीवन नौका संतुलन है तुकांत।
गीतों की गूंज और छांव बनकर,
तकविता की अद्वितीय पहचान बनता है तुकांत !
