STORYMIRROR

Sudhanshu Sharma

Drama Inspirational

4.5  

Sudhanshu Sharma

Drama Inspirational

अटल

अटल

1 min
28K


हम तुम समय से टल गए,

वो अटल आये, अटल गए।


रहा समय उदय-अस्त सा,

पर न माथे पर बल गए,

वो अटल आये, अटल गए।


कभी शंकर के रुद्र-सा,

कभी बच्चों से चहक गए,

वो अटल आये, अटल गए।


संघर्षो के आत्म-तप में,

प्रबल हुए-प्रखर गए,

वो अटल आये, अटल गए।


वादों के कुशल सारथी थे,

कभी न रथ के वचन गए,

वो अटल आये, अटल गए।


पोखरण के लौह-पुरुष,

कविता के मर्म-हृदय गए।

वो अटल आये, अटल गए।


पुनः जीवित जन जन में,

मृत्यु को भी छल गए,

वो अटल आये, अटल गए।


व्यक्ति खोया व्यक्तित्व रहा,

अर्थी आयी-कफ़न गए,

वो अटल आयेे, अटल गए।


कोई आया है न आएगा,

दशक आये शतक गए,

वो अटल आये, अटल गए।


संसार के कोलाहल में,

कितने स्मृति -पटल गए,

वो अटल आये, अटल गए।


हृदय मुग्ध मुस्कान लिए,

विश्व नेत्र कर सजल गए,

वो अटल आये, अटल गए।


कालजयी विश्व-युग पुरुष,

अंत आया-अनंत गए,

वो अटल आये, अटल गए।


करके जग, मन - बंधन में 

उन्मुक्त हुए, स्वच्छंद गए 

वो अटल आये, अटल गए 


स्मृतियों में घर करने को,

घर से 'स्मृति-स्थल' गए,

वो अटल आये, अटल गए।


अविरल विचार, वाणी अविरल,

अविरल गंगा के भँवर गए,

वो अटल आये, अटल गए।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

More hindi poem from Sudhanshu Sharma

Similar hindi poem from Drama