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AVINASH KUMAR

Romance Tragedy

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AVINASH KUMAR

Romance Tragedy

अतीत

अतीत

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अतीत की ड्योढ़ी पर खड़ी तुम

मैं वर्तमान के इस पार

मिलोगी क्या ?


मैं हूँ एक खुला हुआ सिरा

और तुम एक ओर से बंधी

जानता हूँ मैं पवन की तरह

और तुम गगन के छोर से बंधी

मैं लाख कहने पर भी कह नहीं सकता

तुम्हारी तरफ हो कर बह नहीं सकता

फिर भी बिना कहे एक अंतिम बार 

मिलोगी क्या?


अतीत की ड्योढ़ी पर खड़ी तुम

मैं वर्तमान के इस पार

मिलोगी क्या??


मैं स्वयं से कब का मंत्रणा कर चुका

जीवन को जमा भाग, गुणा कर चुका

अब तुम्हें बताऊं तो बताऊं क्या, 

गिनतियाँ गिनाऊँ तो गिनाऊँ क्या

मैं समय को काटता हूँ और तुम भी

अपने को मैं बांटता हूँ और तुम भी

जब हम और तुम कर लेंगे सब कुछ तार तार

मिलोगी क्या?


अतीत की ड्योढ़ी पर खड़ी तुम

मैं वर्तमान के इस पार

मिलोगी क्या ?


अब हृदय की तुमसे बात क्या करूँ

कह कर तुम पर आघात क्या करूँ

है ये वियोग अंत तक चलेगा

मौन का उपयोग अंत तक चलेगा

और अगर तुम कुछ भी ऐसा मानती हो

अंत के उपरांत एक दिन जानती हो

जीवन जब बोलेगा हम दोनों का सार

मिलोगी क्या ?


अतीत की ड्योढ़ी पर खड़ी तुम

मैं वर्तमान के इस पार

मिलोगी क्या ?


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