कोई मुझसा होगा नहीं
कोई मुझसा होगा नहीं
कोई मुझसा होगा नहीं
कापियाँ करो चाहे जितनी,
कोई मुझसा होगा नहीं,
मेरी राहों पर चलकर भी,
मेरा जैसा होगा नहीं।
शब्द मेरे, अंदाज़ मेरा,
मेरी अपनी पहचान है,
भीड़ भले ही साथ चले पर,
मेरा अपना आसमान है।
मेहनत की स्याही से लिखता,
किस्मत की हर एक कहानी,
गिरकर उठना सीख लिया है,
यही है मेरी निशानी।
मेरी खामोशी को कमजोरी,
समझने की भूल न करना,
मैं वक्त आने पर क्या हूँ,
इसका अंदाज़ा तुम मत करना।
कापियाँ करो चाहे जितनी,
नकल में रंग भरे होंगे,
पर मेरे जैसे बनने वाले,
मुझसे ही कम खरे होंगे।
मैं अपनी धुन में चलता हूँ,
मंज़िल मेरी अपनी होगी,
दुनिया चाहे लाख बदल जाए,
मेरी पहचान वही होगी।
कापियाँ करो चाहे जितनी,
कोई मुझसा होगा नहीं,
मैं एक ही हूँ इस दुनिया में,
मेरा दूसरा कोई होगा नहीं।
