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ललित सक्सैना

Abstract Romance

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ललित सक्सैना

Abstract Romance

अश्क

अश्क

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पलकों पे ठहरा इंतजार करता हूं

कभी इज़हार तो कभी इंकार करता हूं


हूं तो बस बंद पानी की

हाल ए दिल बयां हर बार करता हूं


मेरी हर खुशी अधूरी मेरे गम भी तन्हा है

रहता हूं अंधेरों में आंखे नम हर बार करता हूं


पलको पे ठहरा इंतजार करता हूं

कभी इज़हार तो कभी इंकार करता हूं।

मैं अश्क हूं आंखो से बार बार गिरता हूं।


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