अपने दिल की बात सुनो...
अपने दिल की बात सुनो...
सोचते कुछ हो,
बोलते कुछ हो,
करते कुछ हो ...
ये कैसा छल
कि तुम्हें
इस बात का भी
इल्म नहीं
कि तुम खुद से ही
छल करते हो !
अगर कुछ सोचना हो,
अगर कुछ बोलना हो,
अगर कुछ करना हो,
तो दिल खोल कर करो !
ईमान से कहो
जो तुम्हारे
'पाक' दिल में है...
बेपनाह घुमक्कड़ी में
यूँ आनन-फानन
चलते-फिरते रहना
अगर तुमको
अच्छा लगता है,
तो सिर्फ एक बार
अपने दिल पे
हाथ रखकर कहो
कि तुम्हें इस
बेशक़ीमती, नायाब ज़िन्दगी से
बेइंतहा प्यार है...!
