Become a PUBLISHED AUTHOR at just 1999/- INR!! Limited Period Offer
Become a PUBLISHED AUTHOR at just 1999/- INR!! Limited Period Offer

Vipin Baghel

Romance Fantasy

4.8  

Vipin Baghel

Romance Fantasy

अपना अपना चाँद

अपना अपना चाँद

1 min
79


आजकल तुम मुझे 

कुछ अलग से लगने लगे हो .

जैसे कोई चंदा जमीं पर ,

उतरकर मेरे साथ चलने लगा हो।


शीतलता लिए सुकूँ का जीवन दिए 

अब तुम मुझे भाने लगे हो।

मेरा अंदर का समंदर पहले ,

शांत रहा करता था।


पर अब अपने चाँद से मिलकर ,

उसमें ज्वार उठने लगे हैं।

मुझे नहीं पता कि चकोर को ,

अपने चाँद से मिलकर कैसा लगता होगा।


बारिश की बूंदों में मयूरों को ,

अपनी प्यास बुझाकर कैसा लगता होगा।

पर तुमसे मिलने के बाद शायद मेरी ,

वो तलाश ख़तम सी हो गयी है।


अब हम दोनों की मिलकर जिंदगी में ,

नयी तलाश की तलाश शुरू हो गयी है।

हम दोनों की जिंदगी अलग अलग शुरू हुई थी ,

पर आज दोनों की एक जिंदगी हो गयी है |


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance