STORYMIRROR

Sudhirkumarpannalal Pratibha

Romance

3  

Sudhirkumarpannalal Pratibha

Romance

ख्वाहिश

ख्वाहिश

1 min
127

पहुंचना है

उस

शिखर पर

जहां पर

पाना कोई

शेष न हों

जहां हर

जीव की

अपने

आखिरी

बस्तु प्राप्त

होती है

मैं भी

इस

जीवन सफर

के बाद

थक सा गया हूं 

मुझे मेरी

मंजिल

अभी तक

अप्राप्त हैं

मेरी आखिरी

एक इच्छा थी

तुम हमसफर

बनते मेरे

और अपने साथ

मुझे भी पहुंचाते

उस शिखर पर

जहां पर अप्राप्त

कुछ भी न रहे

चलते तुम

इस सफर में।



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance