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दयाल शरण

Abstract

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दयाल शरण

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अनमोल

अनमोल

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आइए आपके मन को तफ़सीर से पढा जाए

छिपा कोई अनकहा वाकया लिखा जाए।

फिर कभी औरों से मिलाने की कहना

आज बस आपसे ही पुरसुकूँ मिला जाए।


मुस्कुराते हुए चेहरे में होंगे दर्द कई

आग के शोलों से इस बार मिला जाए।

लाख लिखते हैं ऐ तुम पर रुबाई वे लोग

मुख्तसर सी कोई गज़ल इस बार लिखा जाए।


भड़कने की या मुस्कुराने की वजह भी हम,

आंख में भरके ताजा अश्क,यूं ना रुलाया जाए।

अब जो फिसलेगा तो वक्त कई दर्द नए देगा

रूह के फाहों की जरूरत को ना भरमाया जाए।


बहुत जरूरी है, वक्त पे दिल की कहना

दिल पे किसी वक्त की हुकूमत को ना छोड़ा जाए।

कलको यह जिंदगी ना जाने होगी किस जानिब

आज की रात को इस तरहा कत्ल ना किया जाए।


फिर कभी औरों से मिलाने की कहना

आज बस आपसे ही पुरसुकूँ मिला जाए।।

कल को यह जिंदगी ना जाने होगी किस जानिब

आज की रात को इस तरहा कत्ल ना किया जाए।


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