STORYMIRROR

Sandiponi Tasha

Drama

2  

Sandiponi Tasha

Drama

अंजान सफ़र

अंजान सफ़र

1 min
219

सफ़र पर निकला था

कोई मंजिल नहीं

ना ठहरने का पता।


ढूंढने को कुछ खास ना था

बस कुछ खोई हुई

चीजों को लौटाना

चाहता था।


सफ़र अंजान था

मन अशांत

लक्ष्य स्थिर था

पर मंजिल लापता।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Drama