karan ahirwar
Drama
मेरा जो भी नाम था सब अनजान था
सिर्फ़ तेरा इश्क ही मेरी पहचान था
जिसे भगाने में लग जाता है पूरा घर
मैं भी तेरी बातों का वो मेहमान था
तू चाहे जितनी नफरत करे मुझसे
मेरे लिए तो तू ही मेरा रहमान था
नींद और पाप
पहचान
तुम्हारा खत
नींद
मेरी मां
मैं सहर हूं
फ्रीवर्स
तुम(सोनेट)
नया बचपन
तेरे शहर वाले
सीखी जो ज़िन्दगी की लिखाई, तो मैंने भी अपनी इक दुनिया सजाई।। सीखी जो ज़िन्दगी की लिखाई, तो मैंने भी अपनी इक दुनिया सजाई।।
प्यार समर्पण धागा मोती सच्ची राह सही चाह पखौती।। प्यार समर्पण धागा मोती सच्ची राह सही चाह पखौती।।
यह दुनिया, भले दिखती एक जैसी है। पर एक शीशे में, कई तस्वीरें रहती है। यह दुनिया, भले दिखती एक जैसी है। पर एक शीशे में, कई तस्वीरें रहती है।
जो छोड़ो व्यर्थ लोभ, नारी को मान लो लोग आज क्या, कल क्या नारी ही है, असल तोप। जो छोड़ो व्यर्थ लोभ, नारी को मान लो लोग आज क्या, कल क्या नारी ही है, असल तोप।
और भरोसा साथ में समर्पण तेरा बन गया शिव दास अब मानेगा हर हुक्म तेरा। और भरोसा साथ में समर्पण तेरा बन गया शिव दास अब मानेगा हर हुक्म तेरा।
कभी दूर जाते हुए उम्मीदों को तो कभी छिले हुए घुटनों को ! कभी दूर जाते हुए उम्मीदों को तो कभी छिले हुए घुटनों को !
आप के प्यार में डूब गये थे हम, जुदाई की पल मुश्किल होने लगी। आप के प्यार में डूब गये थे हम, जुदाई की पल मुश्किल होने लगी।
कभी कभी याद करने का और भूल जाने का संघर्ष चलता जाता है... ये संघर्ष ही तो जिंदगी है.. कभी कभी याद करने का और भूल जाने का संघर्ष चलता जाता है... ये संघर्ष ही तो जि...
कठोर मेहनत से लगाया है, बीज कैसे न खिलेंगे फूल, शूलों बीच कठोर मेहनत से लगाया है, बीज कैसे न खिलेंगे फूल, शूलों बीच
दिल के जज्बातों को कमाकर ही खुद का खयाल रख पाओगे।। दिल के जज्बातों को कमाकर ही खुद का खयाल रख पाओगे।।
उतर आई धरा पर अप्सरायें आज, नाच रही हैं घूम घूम के। उतर आई धरा पर अप्सरायें आज, नाच रही हैं घूम घूम के।
आज मेरे साथ हादसा हुआ और, हादसे में प्यार मुजे मिल गया।.... आज मेरे साथ हादसा हुआ और, हादसे में प्यार मुजे मिल गया।....
मगर स्वर्णकणो के साथ तिमिर को कैसे हराया जाए सोचता है मन। मगर स्वर्णकणो के साथ तिमिर को कैसे हराया जाए सोचता है मन।
समन्दर में जैसे लहरों पर तैर रही ज़िन्दगी, उफान पर है रहती जैसे हर पल, ये ज़िन्दगी… समन्दर में जैसे लहरों पर तैर रही ज़िन्दगी, उफान पर है रहती जैसे हर पल, ये ज़ि...
फ्रिक नहीं है कोई क्या सोचेगा ? सिर्फ अपने दिल की हर बात सुना करते हैं।। फ्रिक नहीं है कोई क्या सोचेगा ? सिर्फ अपने दिल की हर बात सुना करते हैं।।
होलिका जलाकर, बने प्रह्लाद हमजोली होलिका जलाकर, बने प्रह्लाद हमजोली
हम भी साखी वहां पर थे डूबे, जहां न था एक बूंद जल प्रवाह हम भी साखी वहां पर थे डूबे, जहां न था एक बूंद जल प्रवाह
सुनो मेरे जीवन में और नहीं यह घर तेरा है इस घर की मालकिन तुम ही हो।। सुनो मेरे जीवन में और नहीं यह घर तेरा है इस घर की मालकिन तुम ही हो।।
धीरे धीरे वक़्त बदलता गया... आदमी फिर बदलता रहा... धीरे धीरे वक़्त बदलता गया... आदमी फिर बदलता रहा...
पिता से इस पत्थर से जीवन में जान है। पिता घर की छत और, पिता आसमान है।। पिता से इस पत्थर से जीवन में जान है। पिता घर की छत और, पिता आसमान है।।