STORYMIRROR

dheeraj kumar agrawal

Romance

4  

dheeraj kumar agrawal

Romance

अंदाज़

अंदाज़

1 min
450

शाम ढलते ही लबों पर ग़ज़लों का राज़ है, 

दूर से आ रही हमारे दिल की आवाज़ है, 


लग रहा है मौसम सुहाना आज की शाम, 

लगता है छेड़ा किसी ने इश्क का साज है।


मस्ती है छाई हम पर, दिल डूबा है यादों में, 

कितने ही रंग बिखरे हैं महबूब के वादों में, 


जो बात छिपी थी, उसे सामने तो लाए, 

कि जुबां हमारी ही हमसे नाराज़ है।

 

आसमां में उड़ते बादल आवारों की तरह, 

हम भी खुश हो लिए बहारों की तरह, 


ये और बात है कि हम कुछ कह ना सके, 

कि चुप रहना ही सब कुछ कहने का अंदाज़ है।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Romance