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Dr Lakshman Jha "Parimal"Author of the Year 2021

Tragedy

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Dr Lakshman Jha "Parimal"Author of the Year 2021

Tragedy

" अमृत -धार "

" अमृत -धार "

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किसे मैं अब

पत्र लिखूँ ?

इसके दिन तो

चले गए !

कलम स्याही

और दवातें,

लिखना -पढ़ना

भूल गए !!


किन्हें अपनी

बातें बताऊँ ,

सुनने वाले

अब कहाँ रहे !

दूर दराजों में

कहीं बैठे हैं ,

मिलने वाले

अब कहाँ रहे !!


किसी को

कोई जानता नहीं ,

नहीं उसे

कोई पहचानता है !

कहने को

अज़ीज बन गए ,

नहीं दिल के

करीब रहता है !!


सगे संबंधियों के

नंबर पहले ,

सबको कुछ कुछ

याद रहते थे!

जिज्ञासा

किसी की होने पर ,

उनके नंबरों को

वे कहते थे !!


परिवारों के

लोगों का भी ,

अब नंबर हम

जानते नहीं !

उनकी भंगिमा

और इच्छाओं को

हम तो पहचानते नहीं !!


लिखते हैं

मैं स्नातक हूँ ,

पत्र का जवाब

देते नहीं !

जहाँ दिल

जोड़ने की बात है

वहाँ कभी जोड़ते नहीं !!


आत्मीयता का

मंत्र लाओ,

प्यार करना

तुम सीख लो !

सबको अपना

समझ कर,

स्नेह अमृत धार दो !!



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