अजन्मी परी
अजन्मी परी
ना मारो अजन्मी परी को, साँसों का अधिकार दो
बनी है प्रेम की माटी से, उसको भी तो प्यार दो।
पैदा होते ही जो सुख का स्वप्न बन जाते हैं बेटे
सुख देने वाली बेटी को पैदा होते ही ना मार दो।
आज प्रकृति को मानव ने भेद दिया संसार में ।
ना वृक्ष, ना वायु, ना जल बचा इस हाहाकार में ।
थल बारूद भरा है भरी हैं तरंगे वायुमंडल में
किस स्थान पे ईश्वर बचा है अब इस संसार में।
