STORYMIRROR

Gautam Sagar

Tragedy

4  

Gautam Sagar

Tragedy

ऐसे नहीं जाना था ड्यूड

ऐसे नहीं जाना था ड्यूड

1 min
46

ऐसे नहीं जाना था ड्यूड 

कम बैक करना था ना 

किसकी लाइफ 

रेलवे लाइन की तरह सीधी है 

किसकी लाइफ 

केवल खुशियों से भरी है 

 

मन तो साला पागल है 

मन के चक्कर में मत पड़ 

मन तो साला बादल है 

इसके पीछे पीछे मत बढ़ 

 

मन तो चाहता है 

हर दिन तेरे हाथ में ट्रॉफी हो 

मन तो चाहता है 

हर दिन वही कल वाली कौफ़ी हो 

 

इससे हारना नहीं था 

इससे लड़ना था न 

ऐसे नहीं जाना था ड्यूड 

कम बैक करना था ना 

 

परेशान हो तो फोन लगाओ

तेरे दोस्त किसलिए है 

बेचैन हो तो इंस्टा  

टिवीटर पर बताओ 

तेरे फैन किसलिए है

 

सोशल मीडिया केवल 

हंसी वाली फोटो शेयर

करनी वाली जगह तो नहीं 

सोशल मीडिया पर 

अपने आँसू, 

अपने गम भी ले कर आओ 

 

क्या पता कोई कमेंट में 

लिखी दुआ काम आ जाए 

क्या पता 

कोई लिखा नुस्खा ही 

मन को सुकून दे जाये 

 

आगे अवसाद की अंधेरी गली थी 

लेकिन फिर उम्मीद की लौ लिए 

बढ़ना था न। 

ऐसे नहीं जाना था ड्यूड 

कम बैक करना था ना।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Tragedy