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Dr.Narendra kumar verma

Fantasy

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Dr.Narendra kumar verma

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ऐ संस्कृति के पुजारी

ऐ संस्कृति के पुजारी

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ऐ संस्कृति के पुजारी, विश्वास से ना डोलो तुम,

बदलता है संसार, क्यों बदलते हो तुम,

सरोवर में डुपकी लगाने की तैयारी करलो,

हम सभी सुसंस्कृत बने ऐसा भाव जगाओ तुम,

ऐ संस्कृति के पुजारी, विश्वास से ना डोलो तुम !


भेंट चढ़े है कई बलिदानी ,मातृ की रक्षा करने को,

अभिमानी का कुचला गया सिर, वैभव की तैयारी मे,

हो जाओ तैयार तुम ,अपनी आन बचाने को,

पग -पग पर अटकले है, ना पथ से घबराओ तुम,

मन में हिम्मत और त्याग को ,अपना कर्तव्य बनालो तुम,

ऐ संस्कृति के पुजारी, विश्वास से ना डोलो तुम !


कभी ना होगा अक्षर में फेर,बुराइयों को त्यागो तुम,

स्वतंत्र होकर स्वतंत्रता का ,भाव जगालो तुम,

मस्तक पर धूल माटी की,पहचान बनालो तुम,

कर्त्तव्य भाव का बोध जगाओ,फैला अंधकार मिटाओ तुम,

ऐ संस्कृति के पुजारी, विश्वास से ना डोलो तुम !


मत भूलों शस्त्र राम के,भव्य साकार हो तुम,

भक्षक ओर असुरों का विनाश करने को,

संस्कृति के रक्षा के खातिर,बाण उठालो तुम,

पवित्र और सुगमता की, मधुर सुगंध फैलाओ तुम,

ऐ संस्कृति के पुजारी, विश्वास से ना डोलो तुम !


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