ऐ मेरे वतन की मिट्टी
ऐ मेरे वतन की मिट्टी
ऐ मेरे वतन की मिट्टी।
मस्तक पर तिलक तेरा करके,
गर्वित शीश तन जाता है।
मन प्रफुल्लित हो जाता है,
है नमन मेरा उन वीरों को,
जो तेरी खातिर प्राण दे।
हे वो जीवन बेकार बहुत,
जिस दिल में देश के लिए प्रेम न हो
है नमन मेरा उन परिवारों को,
जिनके वीर है सरहद पर।
नहीं डर उनका बुझने का,
जो दीपक है उनके घर का।
है पाई स्वतंत्रता मुश्किल से,
यारों इसकी कद्र करो।
न जाने कितने शीश कटे,
न जाने कितने दीप बूझे।
है जीवन बहुत छोटा मेरा,
जो इस मिट्टी पर वार सकूं।
है नमन मेरा इस धरती को,
जो जननी है उन वीरों की।
