STORYMIRROR

DR ARUN KUMAR SHASTRI

Inspirational

3  

DR ARUN KUMAR SHASTRI

Inspirational

अहमक, न रे न

अहमक, न रे न

1 min
221

भाग कर कौन जाए 

तेरे शहर की शाम है


सकूँ अब कैसे पाएं 

तेरे शहर की शाम है

बादलों ने ढक लिया

खूबसूरत चन्द्रमा 

बिजलियाँ कड़की 

तड़क कर 

शहर पूरा रौशन किया 


भाग कर कौन जाए 

तेरे शहर की शाम है


सुबह देखी रात देखी 

लुट गया मैं यहाँ 

हुस्न के बाज़ार का

अब बाशिंदा हो गया 


भाग कर कौन जाए 

तेरे शहर की शाम है


बिजलियों से खामख्वाह

दामन जलाऊँ

वसन मेरा तरबतर है 

किसको दिखाऊँ 

डूब कर हूँ फिर से उभरा


भाग कर कौन जाए 

तेरे शहर की शाम है


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Inspirational