अगर तुम नहीं होते
अगर तुम नहीं होते
कौन सहारा होता मेरा?
कहाँ से मैं आता देखने सबेरा?
कैसे वजूद मेरा यह होता??
अगर अब आ गया मैं
तुम्हारी ही बदौलत।
पाया अपार ज्ञान और
अथाह यह धन -दौलत।
शौहरत मिली भरपूर इतनी,
जिंदगी पा निहाल हुआ।
तुम अगर नहीं होते तो,
यह जमीं-आसमान नहीं होता।।
यह मनहर हरितिमा,
जीवों का संसार नहीं होता।
कुछ नहीं होता।
कुछ नहीं होता।
अगर तुम नहीं होते,
हम नहीं होते।।
और न यह संसार होता।
अकेलेपन से ऊब कर,
सारी शक्ति बटोर कर।
कल्पना तुम तब करते,
अपने मनोरंजन के लिए।
तुमको अपना कह पुकारने के लिए।।
सर्कस की तरह जादूगरी भरा,
ऐसा ही संसार होता।
तब तुम भी होते,
मैं भी होता।।
आना और जाना होता।
घर किराये का पाकर,
बार बार नया कपड़ा,
सुंदर तन ऐसा होता।।
अगर तुम नहीं होते।
हम सब नहीं होते।
तुम भी नहीं होते।
अगर तुम नहीं होते।।

