STORYMIRROR

Uttam Panwar

Tragedy

3  

Uttam Panwar

Tragedy

अधभरा ही रहा मैं ....

अधभरा ही रहा मैं ....

1 min
425

हजारों ख्वाहिश मन में दबाता

अनेक बातें लोगों से छुपाता

दोस्तों की भीड़ में भी...

अकेला ही खडा रहा मैं....

अधभरा ही रहा मैं...


अपनी पसंद को भी नापसंद बताता

सही होने पर भी लोगों के लिए गलत बताता

अपने आप को भी...

धीरे-धीरे भुलाता रहा मैं...

अधभरा ही रहा मैं...


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Tragedy